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कार्तिक मास के नियम
डॉ श्रद्धा सोनी

कार्तिक मास के नियम
24 अक्टूबर (बुधवार)से 23 नवंबर (शुक्रवार )👉
1.सुबह जल्दी उठकर स्नान अदि नित्यकर्म करके मगला आरती करे घर पर या मंदिर पास हो तो वह जाए मंगला आरती में (4:00am) से अपना दिन शुरू करे !
2. ब्रह्म महुर्त सुबह 5:00 से 7:00 बजे तक अधिकतम माला का जप करे !
3. प्रतिदिन हरे कृष्णा महमंत्र की कम से कम 16 माला का जप करे ! एकादशी के दिन ज्यादा से ज्यादा माला का जप करे कार्तिक माह में भी रोज 16 से ज्यादा से ज्यादा जप करें!
4.प्रतिदिन तुलसी पूजा करे जल चढ़ाये और परिक्रमा करे और शाम को एक दीप प्रज्वलित करें पूरे कार्तिक मास में👌
5.चाय काफी प्याज लहसुन आदि का सेवन न करे !
6.केवल कृष्ण प्रसाद ही ग्रहण करे !
7.विशेषत: दामोदर लीला एव गोवर्धन लीला गजेंद्र मोक्ष कथा पढ़े (भागवतम स्कन्द 8)!
8.भगवान दामोदर की तस्वीर अपने घर में अवश्ये रखे !
9.दमोदराषटकम का प्रतिदिन शाम को पाठ करते हुए दिप लगाए|
10.भगवान दामोदर को प्रतिदिन दीपदान करे मतलब जब मईया ने लाला को ओखल से रस्सी से बाधा था वो तसवीर उस को ही दामोदर कहते है|
11.कार्तिक मास में उड़द दाल का निषेद करे !
12. पूरा महीना ब्रह्मचरिये व्रत का पालन करे !
13. शुद्ध भक्तो को दान दे !
नोट: उपुक्त नियम पदम् पुराण स्कन्द पुराण से लिए गए है जी
14. स्कन्द पुराण में लिखा है कि जो भी कार्तिक माह में रोज कृष्ण के सामने शाम को दिप लगता है तुलसी जी मे और नदी तालब गोशाला में उसके कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और वो राधा कृष्ण का प्रिय होता है उस जीव को कृष्ण अपने निज धाम गोलोकधाम ले जाते हैं|
15. जो पुरे कार्तिक माह में दीप लगता है उसकी 21 पीढ़ी के पितृ तर जाते हैं उनको भगवान अपने धाम में स्थान देते हैं “|
16.और कार्तिक माह में जरूर वृंदावन धाम जाए कृष्ण को सब से ज्यादा प्रिय है वृंदावन धाम और कार्तिक माह में स्वयं राधा रानी पूरे समय वृंदावन में कृष्ण के साथ होती है इस महीने में ही महारास होता है तो राधा जी और कृष्ण का प्रेम मिलेगा और उनके चरणों में स्थान प्राप्त होगा ।


